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How to Start a Blog using Google Blogger

Blog, दोस्तों आप सब में से कई लोगों ने Blog के बारे में सुना होगा बहुत सारे लोग Blog के माध्यम से अपनी जानकारी को कई लोगो के साथ साझा कर रहे हैं, लेकिन कई सारे ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने Blog के बारे में सुना तो है लेकिन वह नहीं जानते कि आखिर Blog को कैसे शुरू किया जाता है, इसके लिए क्या-क्या जरूरत की चीजें होती है |
                सबसे पहले मैं यह बताना चाहूंगा कि Blog  एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ पर आप अपने विचारों को अपनी जानकारियों को अन्य लोगों के साथ  साझा कर सकते हैं उन्हें कोई नयी चीजे सीखा सकते है जिन्हें आपकी जानकारी के जरूरत है और वैसे भी इंटरनेट एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां आज हर कोई जानकारियां ढूंढते रहता है ऐसे में यदि आपका ब्लॉग कुछ ऐसी जानकारियों पर बना हुआ हो जिसकी जरूरत उन लोगों को हो तो बेशक ही आपकी Blog दुसरो के लिए फायदेमंद हो सकती है और आपको कुछ पैसे भी मिल सकते है |
Why to start a Blog ?
      अब यहॉँ सवाल यह उठता है कि Blog क्यों बनाये जाते  है ? किसी भी ब्लॉग को करने के कई कारण हो सकते हैं मान लीजिए की आपको घूमना बहुत पसंद है या फिर आपको क…

Difference between CAB and NRC Hindi

पूरे  देश में CAB ( Citizenship Amendment Bill 2019 ) और NRCNational Register of Citizens )  को लेकर काफी उथल-पुथल चल रहा है ! देश के कई हिस्सों में इन दोनों नए कानूनों को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन किये जा रहे है ! इस लेख में हम इन्ही दोनों नए कानूनों के बारे में चर्चा करेंगे तथा साथ ही साथ ये भी चर्चा करेंगे की CAB और NRC में क्या अंतर है  ?


difference between cab and nrc


Difference between CAB and NRC ( CAB और NRC में अंतर  )


                                            यूं तो दोनों ही नागरिकता से जुड़े हुए है ! लेकिन दोनों में एक बड़ा फर्क है ! एक नागरिकता देने से जुड़ा हुआ है तो दूसरा अवैध निवासियों की पहचान से ! एक साल में नागरिकता से जुड़े हुए दो एलान किये गए जिसका पुरे देश में विरोध किया जा रहा है ! नागरिकता संशोधन कानून ( CAB ) का देश में व्यापक विरोध हो रहा है ! खासकर , पूर्वोत्तर के राज्यो  में ! इससे पहले NRC को लेकर मौजूदा सरकार को लगातार सफाई देनी पड़ रही थी ! एक तरफ जहाँ सरकार  इन दोनों कानूनों को पूरी तरह सफल बनाने की कोशिश कर रही है तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ राजनैतिक विपक्षी दलों का मानना है कि ये दोनों कानून देश तथा देश के नागरिको के हीत में सही नहीं है ! विपक्षी दलों का कहना है की Citizenship Amendment Bill 2019 मुस्लिम विरोधी कानून है जिससे धार्मिक आधार पर भेदभाव होगा जोकि संविधान के मूल भावना के खिलाफ है ! 
                                                         

                                                               
                           National Register of Citizens (NRC ) के निर्माण का मकसद असम में रह रहे घुसपैठियों की पहचान करना है , जबकि Citizenship Amendment Bill 2019  का मकसद पड़ोसी मुस्लिम देशों में रह रहे स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के उन लोगों को नागरिकता देना है, जो वहां की बहुसंख्यक आबादी द्वारा सताए जा रहे हैं। असम में रहने वाले ज्यादातर घुसपैठिये बांग्लादेश के हैं, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। CAB के जरिए अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को वैध रूप से भारतीय नागरिकता दी जाएगी। 


What is Citizenship Amendment Bill 2019 ( CAB ) नागरिकता संशोधन कानून 2019 क्या है ?



Citizenship Amendment Bill 2019 ( CAB ) के तहत धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश , पकिस्तान तथा अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आये गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देना है ! 
इस बिल से हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध समाज को फायदा मिलेगा।


Citizenship Amendment Bill 2019 ( CAB )


                           खास बात ये है कि इस समूह के सभी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी भले ही उनके पास कोई दस्तावेज हो या हो। ऐसे लोग जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में दाखिल हो चुके हैं, वो भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकते हैं। नागरिकता संशोधन बिल के जरिए नागरिकता अधिनियम 1955Citizenship Act 1955 ) में बदलाव किया गया है !


क्या पहली बार लाया गया है 'नागरिकता संशोधन कानून ( CAB ) ?



नहीं , नागरिकता संशोधन कानून ( Citizenship Amendment Bill ) को दूसरी बार लाया गया है ! इससे पहले जनवरी 2019 में भी सरकार  ने Citizenship Amendment Bill बनाने की कोशिश की थी ! हालाँकि 8 जनवरी 2019 को यह बिल लोकसभा से पास भी हो गया था परन्तु 16वी लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने की वजह से यह निरस्त हो गया था ! 

                                                     पूर्वोत्तर राज्यों - असम , त्रिपुरा , नागालैंड , मिजोरम, मणिपुर, मेघालय तथा अरुणाचल प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे दलों  का कहना है की यहाँ बांग्लादेश से हिंदू बड़ी संख्या में पहले से ही आकर बसे है और यदि  नागरिकता संशोधन कानून 2019  लागू होता है तो इन हिन्दुओ को भारत की नागरिकता मिल जायेगी जिससे इन राज्यों के सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ेगा और स्थानीय लोगो को काफी परेशानी होगी ! नागरिकता संशोधन बिल 2019 में समय सीमा 31 दिसंबर 2014 निर्धारित किया गया है ! 


नागरिकता अधिनियम 1955 ( Citizenship Act 1955 )




भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 में लागू किया गया था, जिसके अनुसार किसी भी विदेशी नागरिक को कुछ शर्तों के आधार पर भारत की नागरिकता दी जाएगी ! इस बिल में अबतक पांच बार (1986, 1992, 2003, 2005 और 2015) संशोधन किया जा चुका है। 

                           भारत में एक समान नागरिकता का प्रावधान है ! भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955  के अनुसार निम्नलिखित में से किसी एक के आधार पर नागरिकता प्राप्त की जा सकती है:

1.  ऐसा व्यक्ति जो  26 जनवरी, 1950 को या उसके पश्चात भारत में हुआ हो, वह जन्म से भारत का नागरिक होगा. अपवाद राजनयिकों के बच्चे, विदेशियों के बच्चे !

 2. वंश या परम्परा के आधार पर नागरिकता :  26 जनवरी, 1950 के बाद भारत के बहार जन्म लेने वाला व्यक्ति भारतीय माना जाएगा, यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई भारत का नागरिक हो !

3.  भारत सरकार से देशीयकरण का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर भारत की नागरिकता प्राप्त की जा सकती है !

4.  निचे दिए गए वर्गों में आने वाले लोग भी पंजीकरण के द्वारा भारत की नागरिकता  प्राप्त कर सकते हैं:

A. वैसा व्यक्ति जो पंजीकरण प्रार्थना-पत्र देने की तिथि से छह महीने पहले से भारत में रह रहा हों

B.  वे भारतीय, जो अविभाज्य भारत से बाहर किसी देश में निवास कर रहे हों

C.  ऐसी स्त्रियां, जो भारत के नागरिक से विवाह कर चुकी हो या भविष्य में विवाह करने वाली हो 

D.  भारतीय नागरिकों के नाबालिक बच्चे भी पंजीकरण के द्वारा भारत की नागरिकता ले सकते है 

E.  राष्ट्रमंडलीय देशों के नागरिक, जो भारत में रहते हों या भारत सरकार की नौकरी कर रहें हों. आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं !


5.  यदि भारत किसी भू-भाग को अपने में सम्मिलित करता है तो उस भू-भाग पर निवास करने वाले लोग भी स्वतः भारत के नागरिक हो जाएंगे 



भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम 1986 




इस अधिनियम के आधार  पर भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम 1955  में निम्लिखित  संशोधन किए गए हैं:
(i) अब भारत में जन्मे केवल उस व्यक्ति को ही नागरिकता प्रदान की जाएगी, जिसके माता-पिता में से एक भारत का नागरिक हो !
(ii) जो व्यक्ति पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें अब भारत में कम से कम पांच सालों तक निवास करना होगा ! पहले यह अवधि छह महीने थी !
(iii) देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्रदान की जायेगी जब  संबंधित व्यक्ति कम से कम 10 सालों तक भारत में रह चुका हो ! पहले यह अवधि 5 वर्ष थी ! नागरिकता संशोधन अधिनियम 1986 जम्मू-कश्मीर असम सहित भारत के सभी राज्यों पर लागू होगा !


भारतीय नागरिकता का अंत



भारतीय नागरिकता का अंत निन्म प्रकार से हो सकता है:

A.  यदि कोई नागरिक अपनी नागरिकता का परित्याग कर दे 
B.  यदि कोई नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार कर ले 
C.  सरकार के द्वारा नागरिकता छीनने  पर भी भारतीय नागरिकता का अंत हो जाता है 


                             अब तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था और अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाले लोगो को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने तथा हिरासत में लेने का प्रावधान था ! नए विधेयक में ये प्रावधान है की तीन पडोसी देशो के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हो तो उन्हें  Citizenship Amendment Bill 2019 ( CAB ) अर्थात नागरिकता संशोधन बिल 2019  के अनुसार   नागरिकता दी जा सकती है !


What is National Register of Citizens (NRC ) राष्ट्रीय  नागरिक रजिस्टर क्या है ?



                                               19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बहार करने की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए NRC लाया गया है ! 

National Register of Citizens (NRC )


                      NRC यानी National Register of Citizens (NRC) के निर्माण का मकसद असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों और वहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करना है ! अगस्त 2019 में जो अंतिम सूची जारी किया गया था उसमे राज्य के 3.29 करोड़ लोगों में से 3.11 करोड़ लोगों को भारत का वैध नागरिक करार दिया गया, वहीं करीब 19 लाख लोग इससे बाहर हैं ! अंतिम NRC में उन लोगों के नाम शामिल किए गए, जो 25 मार्च 1971 के पहले से असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं ! हालाँकि केंद्र सरकार का कहना है की राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को सिर्फ असम तक ही नहीं बल्कि पुरे देश में लागू करना है !

                          NRC को 1951 में तैयार किया गया था ! इसके अनुसार वैसे लोग जो असम में बांग्लादेश बनने के पहले आये थे उन्हें ही भारतीय नागरिक माना जायेगा !

                         असम भारत का पहला ऐसा राज्य है जिसके पास राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC )  है ! 1979 में अखिल असम छात्र संघ ( AASU ) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान करने तथा   निर्वासन की मांग करने हेतु  6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था जो  15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद समाप्त हुआ था ! 

इस प्रकार हम ये जान चुके है की CAB and NRC में क्या अंतर है !



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